shekh chilli ki new comedy
(shekh chilli ki new comedy)
सेठ का इतना नुकसान हो गया था , वह बुरी तरह चीखते हुए बोला- " ओ बदमाश , तने म्हारो इत्तो बड़ो
नुकसान कर दियो है । म्हारे सौ रुपये के अण्डे फोड़ दिए । शेख रोते हुए बोला- " सेठ , तुम्हारा
तो सौ रुपये का ही नुकसान हुआ है । सौ रुपये तो तुम कमा लोगे । मेरा तो बहुत बड़ा नुकसान हो गया है
। मेरा सारा परिवार और व्यापार ही खत्म हो गया है , मेरा बहुत बड़ा मुर्गी फार्म , बहुत बड़ा डेरी फार्म ,
महल और एक दर्जन बच्चे , लाखों की जायदाद सब कुछ खत्म और बर्बाद हो गया । मैं इतना बड़ा
shekh chilli ki
नुकसान कैसे बर्दाश्त करूंगा , हाय , मेरी बीवी , हाय मेरे एक दर्जन बच्चे - हाय । असलम | मेरे बच्चे-
शेख रो रहा था , पागलों की तरह छाती पीट - पीट कर अपने बाल नोच रहा था । सेठ ने जब उसका यह
हाल देखा तो अपने नुकसान को भूलकर चुपचाप वहां से भाग खड़ा हुआ । वहां से चलकर शेख जी घर
पहुंचे , यार - दोस्तों से अपने हुए नुकसान का जिक्र किया तो दोस्तों ने खूब हंसी उड़ाई । यह बात फैलते
फैलते बड़ों तक पहुंची तो वे भी हंसे । उसके बाद तो मूरों की दुनिया में एक और नाम जुड़ गया - '
शेखचिल्ली । '
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तथा मनीआर्डर फार्म दिया और कहा कि इन्हें मनीआर्डर कर आओ।शेख जी रास्ते
में सोचते गये कि 2 शेख जी तार घर में शेख जी गांव से आकर शहर में नौकरी
करने लगे । एक बार शेख जी को मालिक ने कुछ रुपा तार से रुपये
किस तरह जायेंगे ? फिर भी उन्होंने तार कर्मचारी से पूछा - क्या रुपये तार से
जा सकत हैं तो डाक - तार बाबू ने बताया कि हां चले जाते हैं । एक दिन शेख जी
को वेतन मिला तो उन्हें याद आया कि उनकी बेगम ने चलते समय
शेख चिल्ली वीडियो कॉमेडी
कहा था कि चमेली का तेल भेज देना । उन्होंने उसी समय चमेली के तेल की
शीशी खरीदी और तार घर पहुंच कर कहा - ' " इसे तार से भेज दीजिए ,
जल्दी पहुंच जाएगी । " बाबू समझ गया कि यह कोई महामूर्ख आदमी है ।
उसने उनसे तेल की शीशी लेकर रख ली और शेख जी वहां से चले आये ।
कुछ समय बाद घर से चिट्ठी आई कि तेल की
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शीशी अभी तक नहीं आई - क्या कारण है ? शेख जी तार घर पहुंचे और बाबू से बोले- " क्यों जी , जल्दी के कारण तो मैंने शीशी तार से भेजी थी और वह अब तक नहीं पहुंची । " बाबू ने उत्तर दिया- " बात यह है कि जब तुम्हारी शीशी तार से जा रही थी तब किसी ने उधर से एक डण्डा तार से भेज दिया था । तुम्हारी शीशी उसके साथ टकराकर
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टूट गई । अब तुम ही बताओ , मैं क्या कर सकता हूं ? " शेख जी ने कहा- " हाँ भई , इसमें तुम्हारा क्या कसूर है , यदि मुझे वह डण्डे वाला मिल जाये तो मैं उसका सर फोड़ दूं । " यह कहते हुए शेख जी वहां से चले आये
शेखचिल्ली सिनेमा देखने गए एक दिन शेख जी अपनी बीवी के साथ फिल्म देखने गए । उन दिनों फिल्में बोलती नहीं थी मैजिक सैन जैसी चीजे चली आ रही थी । शेखचिल्ली अपनी पत्नी से बोले- " यहां थियेटर में मजाक करके
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दिखा ? " " दिखाओ । " " मुझे मूर्ख न समझना ... मजाक करुंगा । " " देखती रहो । " थोड़ी देर के बाद जब पर्दे पर एक विलेन ने हीरोइन को पकड़कर बलात्कार करने की चेष्टा की तो वह चिल्लाई- " बचाओ ... बचाओ । " यह आवाज फिल्म में से नहीं आ रही थी बल्कि हीरोइन के हाव - भाव से लग रहा था जैसे वह अपनी इज्जत बचाने के
लिए चीख - पुकार कर रही हो । यह तो सिर्फ हॉठ हिला रही थी । शेखचिल्ली ने चारों ओर देखा । फिर उठकर खड़े हो गये और चिल्लाये- " ठहर जा बदमाश ! मैं आ रहा हूं ... हरामजादे । छोड़ दे इस लड़की को वर्ना ... तमाचों से तेरा मुंह लाल कर दूंगा ... मेरा
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नाम शेखचिल्ली है । " शेखचिल्ली की पत्नी हंसते - हंसते लोट - पोट हुई जा रही थी जबकि कुछ लोग उसकी मूर्खता पर उसे लानत भेज रहे थे । अधिकांश दर्शक हंस रहे थे
