shekhchilli
(shekhchilli ki new comedy)
शेखचिल्ली के ख्याली - पुलाव एक दिन शेखचिल्लो को अम्मो ने उससे कहा भेटे । अब तुम
जवान हो गए हो । अब तुम्हें कुछ काम - वधा करना चाहिए । " उठाता रहेगा कोई भी काम
करो । लेकिन मुझे तो कोई काम आता ही नहीं , फिर मुझे कौन
काम पर रखेगा ? कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा बेटे , तू खुद ही सोच कि मेरा बूढा शरीर कब
तक तेरा बोर " आप ऐसा कहती हैं तो ठीक है , मैं काम की तलाश में चला जाता हूं । आप
बदिया सा भोजन मनाइए , मैं खा - पीकर चला जाऊंगा । shekhchilli ki new comedy
अभी बना देती हूं । " शेखचिल्लो की अम्मी ने उनके लिए बढ़िया - बढ़िया पकवान बनाये
और खिला - पिलाकर उन्हें नौकरी की तलाश में भेज दिया । वह मस्ती में झूमते हुए घर से
बाहर निकल पड़े । उनके दिमाग में नौकरी और मजदूरी के सिवा और कोई
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बात नहीं थी । रास्ते में उन्हें एक व्यक्ति मिला जो अण्डों का झाबा सिर पर लिए परेशान हो
रहा था । बोझ के मारे उसके कदम लड़खड़ा रहे थे । उसने शेख को देखते ही कहा- "
ऐ भाई । मजदूरी करोगे ? " " बिल्कुल करूंगा , बन्दा तो मजदूरी की तलाश में ही
है । " " तो मेरा यह झाबा ले चलो । इसमें अण्डे हैं । टूट न जाएं । तुम इसे मेरे घर तक पहुंचा
दोगे तो मैं तुम्हें दो अण्डे दूंगा । " " सिर्फ दो अण्डे । " " हां , कम नहीं हैं , जरा सोचो तो
सही , दो अण्डों से तो इंसान की तकदीर बदल सकती है और मेरा घर भी ज्यादा
दूर नहीं है । " " ठीक है , मैं चलता हूं ।
new शेख चिल्ली की फिल्म
और उसने अण्डों का शामा अपने सिर पर रख लिया । दो अण्डों से तकदीर बदलने की बात
गहराई तक उसके दिमाग में बैठ गई थी । शेखचिली सेठ के साथ - साथ चले आ रहे थे और
उनके दिमाग में हवाई किले बनाने किए । यह सोच रहे थे यह मुझे दो अण्डे
देगा । इन दो अण्डों से दो चूजे निकलेगा पूजे बड़े होंगे । एक भुगाँ और एक मुगा । मुगाँ रोज
अपडे देगी । बच्चे अनेंगे । कुछ दिनों में बहुत सी मुर्गियां हो जाएंगी । सभी अण्डे
दिया करेंगी । अण्डे बेचने से बहुत आमदनी होगी । फिर तो पैसों की कमी नहीं रहेगी ।
शानदार बंगला बनवाऊंगा । बहुत सी जमीन खरीदूंगा । भैस खरीदकर डेरी बनाऊंगा ।
दूध बेचूंगा । दूध और अण्डों का थोक
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व्यापारी बन जाऊंगा । इस प्रकार पूरे इलाके में धाक जम जाएगी । सब मेरा भारत पसन्द करेंगे और खरीदेंगे । काफी दौलतमन्द बन जाऊंगा । shekhchilli ki new comedy जय पास में दौलत हो जायेगी तो बड़े बड़े लोग अपनी बेटियों के रिश्ते लेकर आएंगे । किसी नवाब की बेटी से शादी करूंगा । माँ भी क्या याद करेगी कि कैसा मेहनती और अक्लमन्द बेटा पैदा किया है । जब शादी होगी तो बच्चे भी जरूर होंगे ।
बच्चे एक दर्जन से कम नहीं होने चाहिए । पड़ोसी के आठ बच्चे हैं । उससे ज्यादा होने इसलिए जरूरी है कि कभी झगड़ा हो गया तो मेरे बच्चे पिटेंगे नहीं । उसके बच्चों को ही पोट कर आएंगे । लेकिन पड़ोसी के बच्चे आपस में लड़ते हैं तो क्या मेरे बच्चे भी आपस में लड़ेंगे ? जरूरी है कि लड़ेंगे । जब लड़ेंगे तो रोएंगे , शोर करेंगे , मेरे पास अपनी शिकायत लाएंगे । मैं परेशान भी हो
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जाऊंगा । तब मेरा वह भी खराब हो जाएगा ... वह जो बड़े लोगों का अक्सर खराब होता है , यानी वो ही गो बड़े आदमी कहते हैं कि उसका वो बिगड़ गया , मैं भी बड़ा आदमी बन जाऊंगा उस वक्त । इसलिए मेरा भी यो खराब हो जाएगा , बच्चों के शोर , झगड़े और अपने पास शिकायत लेकर आने से । लेकिन वो जो होता है उसका नाम तो याद नहीं आता । क्या इस सेठ से पूछ लूं ? नहीं -
नहीं , मैं इतना बड़ा आदमी हो गया हूं तो क्या एक shekhchilli ki new comedy मामूली शब्द को भी औरों से पूडूंगा । नहीं पूडूंगा । याद करता हूं । हां , याद आया मूड । जब बच्चे शोर करते आएंगे " अब्बा असलम ने मेरा कुर्ता फाड़ दिया । " " अब्बाजान तौफीक ने मेरी आंखों में सन्तरे के छिलके का रस निचोड़ दिया । " उसने बहुत जोर से उछलकर शटअप कहा तो उसका पैर रास्ते में पड़े एक पत्थर पर जा पड़ा
और वह धड़ाम से झाबे समेत जमीन पर जा गिरा और सारे अण्डे फूट गए । शेख साहब माथा पकड़कर बैठ गये और चारों ओर देखते हुए रोने लगे । 10

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